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पद्मावत का फिल्म रिव्यू: अपने इतिहास के लिए जरूर देखे

सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात ये है, पद्मावती का विरोध करने वालों को भी होगा अफसोस की उन्होंने एक राजपूत समाज की आन बान और शान रानी पद्मनी के सामान और दृढ़ता को नहीं समझा. फिल्म को देखना ही अपने आप में भारत और भारत के इतिहास पर गर्व करने वाली बात है. करनी सेना के विरोध के बाद पद्मावत अब 25 जनवरी 2018 को बड़े परदे पर रिलीज़ होने जा रही.

Is Deepika Padukone being paid more than Ranveer, Shahid for Padmavati Movie?

फिल्म जाने माने निर्देशक संजय लीला बंसाली द्वारा बड़े परदे पर आरही है. फिल्म के मुख्य किरदार के रूप में दीपिका पादुकोण, राजपूतानी शान महारानी पद्मावती, शाहिद कपूर, महाराज रावल रतन सिंह और रणवीर सिंह, खिलजी के किरदार में नज़र आएंगे.

पद्मावत अपने आप में रानी पद्मिनी की जिंदगी की वो संक्षेप विवरण है जिसपर सिर्फ राजपूत समाज को ही नहीं अपितु सारे भारत को गर्व होना चाहिए. पद्मावत पर हमने देखा देश भर में कितना बवाल हुआ, जगह जगह पद्मावत के नाम पर हिंसा हुई. और एक रानी की कहानी को गलत दिखने के कारण देश को काफी विरोध झेलना पड़ा.

पर इस विरोध की देश को आवश्यकता थी, या हमारे देश में आधी से ज्यादा चीज़े राजनीतिक भेट चढ़ जाती है. पद्मावत के साथ भी यही हुआ है. फिल्म देखी, कमियां ढूंढी, ३ घंटे बीत गए, पर समझ नहीं आया विरोध किस बात का. और ये मैं एक मूवी रिव्यु के लहजे से नहीं लिख रही. एक राजपूत होने के नाते भी लिख रही हूँ.

राजपूत होना खुद में ही गर्व की बात है और ये फिल्म पद्मावती हमारे गौरव में एक अलग मिसाल बनाकर रहेगी. रानी पद्मावती जिससे सिर्फ आज तक राजस्थान में ही देवी माना जाता है अब तो न सिर्फ देश में अपितु दुनिया में भी राजपूत के आन बान और शान में नाम दर्ज हो चूका है. हमे अपने इस साहस पर गर्व होना चाहिए और संजय लीला बंसाली को इस कार्य के लिए सराहना चाहिए.

Release Date issue on Padmaavat

फिल्म में कुछ बदलाव, जैसे घूमर नृत्य में रानी पद्मावती की कुर्ती को लम्बा करना और सिर्फ उनके पति के अलावा कोई उस समय वह मौजूद न होना और बदलाव के साथ अब प्रस्तुत की गयी है.

आइये फिल्म की बात करते है. तो फिल्म संजय लीला कृत है तो भव्य सेट्स, राजपूत राजाओ की दिलेरी और रानी पद्मावती का जौहर देखना तो बनता है. फिल्म में, रानी पद्मावती, रावल रतन सिंह की वीरता का बखान बखूबी किया गया है. और वही दूसरी और अलाउद्दीन खिलजी को एक विकृत मानसिकता वाले विलासी और व्यभिचारी शासक के रूप में दिखाया गया है. अलाउद्दीन खिलजी को एक तानाशाह शासक के रूप में प्रस्तुत किया गया है. अलाउद्दीन खिलजी अपने चाचा की बेटी से विवाह करता है और फिर शासन के लिए चाचा की ही हत्या कर दिल्ली की गद्दी पर बैठ जाता है.

रानी पद्मिनी, रावल रतन सिंह और पूरे चित्तौड़ की रगों में वीरता और स्वाभिमान का खून दौड़ते दिखाया गया है. घूमर के दृश्य में रावल रतन सिंह के अलावा चित्तौड़ का भी कोई मर्द मौजूद नहीं है और यही राजपूतो की शान है.

रानी पद्मावती की वीरता और समयानुकूल चातुर्य का अनूठा त्याग का दृशय अद्भुत और गौरवान्वित होने पर मजबूर करने के लिए काफी है. एक वीरांगना के रूप में सामने आई हैं रानी पद्मावती के रूप की चर्चा सुनकर पागल हुआ खिलजी केवल उनका प्रतिबिंब देखता है।

दरअसल एक जिम्मेदार रानी के रूप में खुद रानी ने निर्णय लिया कि प्रजा की बड़ी भलाई को देखते हुए विलासी खिलजी की एक ओछी इच्छा पूरी कर युद्ध टालने की कोशिश की जाए। ऐसा न हो पाया। बाद में खिलजी के भवन में आकर रतन सिंह को छुड़ाना और जौहर जैसी घटनाओं तक हर दृश्य में रानी पद्मावती एक ऐसी वीरांगना के रूप में सामने आई हैं जो राजपूत आन बान शान और जिम्मेदार राजघराने की परंपरा को आगे बढ़ाती दिखीं हैं।

वह एक ऐसी महिला शक्ति के रूप में सामने आईं हैं जो अपनी प्रजा के लिए दया भी रखतीं हैं और जरूरत पड़ने पर दमन का जौहर की भी हिम्मत रखती है. उनकी इस पतिव्रता की दृढ़ता और एक रानी होने के नाते जरुरत पड़ने पर चतुर नीति का प्रयोग करना भी सूझ भूझ से आता था. वह राजनीति की बारीकियों को समझती हैं और छली को छल और बल दोनों से घुटने टेकने पर मजबूर करने की शक्ति रखती है.

फिल्म में रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण, शहीद कपूर के अलावा अदिति राव हैदरी (अल्लुद्दीन खिलजी, की बेगम महरूनिसा के किरदार में नज़र आएगी), राजा मुराद, अल्लुद्दीन खिलजी के चाचा के रूप में नज़र आएंगे, जिसको मारकर अल्लुद्दीन खिलजी दिल्ली का सुल्तान बनता है. जिम सरभ, मालिक नायब काफूर, अल्लुद्दीन खिलजी का एक ख़ास अनौपचारिक दास के किरदार में नज़र आएंगे.

पद्मावती फिल्म देखा जाए तो अल्लुद्दीन खिलजी के आसपास ज्यादा घूमती नज़र आती है. उसकी क्रूरता और जिद्द के आगे पीछे नज़र आती है. पद्मावती की पुरानी कहानी के हिसाब से पद्मावती का तोता जिससे वो बहुत बाते किया करती थी नज़र नहीं आया. शायद संजय लीला बंसाली भूल गए. और इतिहास में बेगम महरूनिसा ने रानी पद्मावती और राजा रावल रतन सिंह की मदद के कोई प्रमाण नहीं मिलते पर आपको फिल्म को देखने में अवयश्य मिलेंगे.

गेट मूवी इन्फो की तरफ से पद्मावत 3.5 स्टार्स।

रिव्यु: रवि टोंडक द्वारा

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